They also serve who stand and wait:


Painted Grasshopper, Dactylotum bicolor. Also known as the Rainbow Grasshopper.

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3 thoughts on “They also serve who stand and wait:”

  1. परम आदरणीय
    मै आपको अपनी एक कविता समर्पित करने जा रहा हूँ जिसका उनवान है स्वप्न– जगत
    कई रोज तक स्वप्न जगत की घटनाओ से था घबराया
    रहा सोचता बहुत किंतु परिणाम स्वप्न का समझ ना पाया
    मात्र स्वप्न ही जाग रहा था उसे तनिक भर नीद न आयी
    कभी दुखो ने भय दिखलाया कभी दुखो की हुई बिदाई
    और स्वप्न मे किसी रोग से ग्रस्त बहुत बेचैन रहा करता था
    विस्तर पर दिन रात दर्द से मै तडपा करता था
    कभी कभी तो अवसादो का मेघ बुद्धि पर छा जाता था और कभी तो क्रूर मौत का हाथ गले तक आजाता था
    किंतु भला उस रोज स्वप्न मे यह कैसे सम्भव हो पाया
    जैसे कोई जीवन से भरपूर गीत था मुझे सुनाया
    जैसे कोई स्वय चरण मे नूपुर बांध रहा हो
    रुनझुन रुनझुन के स्वर मे वह मुझको जगारहा हो
    जैसे बजा रहा हो बंशी ब्रज मे गोकुल का ग्वाला
    मैया के करतल पर जैसे नाच रहा हो नंद लाला
    जैसे घर मे महक उठे हो फूल रात रानी के
    जैसे मीरा भजन गा रही हो चंदन पानी के
    रोज मौत सिरहाने रहती उस दिन दूर खडी थी
    पीडा की अनुभूति न जाने कैसे कहाँ पडी थी
    उन्ही क्षणो मे जीवन के नवगीत ओ मेरे मीत तुम्ही गाए थे क्या
    सच कहना उस रात स्वप्न मे छिपकर तुम आए थे क्या ?

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